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ये ज़िन्दगी भी कितनी अजीब है?

कभी देती है छाव, कभी देती है धूप,

ज़िन्दगी के होते हैं कई अलग अलग रंग रूप।

अगर एक बार इसे समझ जाए तू ,

तो हर दुःख या सुख में, तू खुशियां बिखेर सकता है खूब।



क्यूँ जान कर भी प्यार में पड़ जाते हैं सब,

क्यूँ दिल के दुःख जाने पर भी ऊपर से मुस्कुराते हैं सब।

और क्यूँ ज़िन्दगी  में हमें खुल के जीना सिखा जाते हैं सब,

क्यूँ हम खुद को इतना रुलाते हैं जबकि इतना हँसाते हैं सब।

Ankita Shukla
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