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जीवन का उपहास है मृत्यु,
एक कठिन आभास है मृत्यु l
दिन-प्रतिदिन आलंबन करता,
समयांतर का पाश है मृत्यु ll

पुण्य-पाप के जोड़ घटाने,
कितने तन हैं आने जाने l
चाहे जितना गणित लगा लो,
एक अटल इतिहास है मृत्यु ll

अनुचर इसके तुम भी,हम भी,
बजा रही चहुं ओर दुदुंभि l
यायावर बन गृह-गृह घूमे,
एक तिरोहित त्रास है मृत्यु ll

'दंभ-मुकुट' जो धारण करते,
भ्रम है उनको 'हम ना मरते' l
आयु के इस सतत काल मे,
एक स्थिर अवकाश है मृत्यु ll

जीवन का उपहास है मृत्यु,
एक कठिन आभास है मृत्यु ll

 




Manshi 'Sundar'

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