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स्व. श्री जैतराम धमैनिया – Late Shree Jaitram Dhameniya

 

काव्यमयी शक्ति के धनी जिनके ह्रदय से निकले शब्दों ने पूरे जीवन भर साहित्य की सेवा की हैI छोटे से नगर मऊरानीपुर में जन्मे विशाल ह्रदय के कवि स्व. पंडित जैतराम जी धमैनिया ने बुन्देली भाषा में अनेकों विधाओं पर अपनी रचनायें लिखींI देश के चिंतन में, क्रन्तिकारी आन्दोलन में उनकी काव्य कला की तलवार चलती दिखीI वे छंद काव्य के श्रेष्ठ कवि थेI माँ दुर्गा पर उनकी आस्था और अटूट विश्वास बड़े से बड़े संकट हरने में समर्थ थाI उनके मन की गहराई से निकली कविता "महियर वारी", इतनी सजग है कि उसको पढ़कर मन आनंदित हो उठता हैI "चित्रकूट" पर उनके द्वारा लिखी रचना चित्रकूट की गरिमा को दर्शाती हैI इसके अतिरिक्त उन्होंने अनेकों रचनाएँ लिखीं जिन्हें हम शीघ्र ही वेबसाइट पर उपलब्ध करायेंगेI

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