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जब जब वाधा आती है,
वो पहले लड़ने जाती है।
जीवन की हर मुश्किल से मुझको,
मेरी माँ की दुआ बचाती है।।

जब जब मैं गिर जाता हूँ,
और फिर से उठ न पाता हूँ।
मेरी बहन सहारा देती है,
मैं फिर आगे बढ़ जाता हूँ।।

जब जब दुःख के बादल छाते हैं,
न किसी से कुछ कह पाते हैं।
वो दिल की बात समझ के मेरी,
मेरे दुःख को ही ले जाती है।।

कोई तुलना नहीं है नारी की,
वो बहुत अधिक बलसाली है।
तोल के देखो शब्दों को तो,
नर से भारी नारी है।।

मेरे जीवन के हर पन्ने पर,
नारी से ही रंग हैं।
शायद पिछले जन्मों के पुण्य हैं,
जो नारी मेरे संग है।।

 

Kushal Rusia
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