Loading

 

था चेहरा मुरझाया सा।
सब कुछ खो के, कुछ पाया सा॥

मैं समझ गया, वो पति हो गया।
मित्र मेरा एक सति हो गया ||

था जीवन में घोर अन्धेरा।
नाग आप थे, पत्नी सपेरा॥

मैं समझ गया, वो मति खो गया।
मित्र मेरा एक सति हो गया॥

है याद में अर्पित श्रद्धा फूल।
में नहीं करूँगा ऐसी भूल॥

 

Vikram Rusia
Follow him:
Latest posts by Vikram Rusia (see all)

Facebook Comments

Top
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: