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हे भारत माता! मैं तुझको शीश नवाता,
तेरे चरणों मैं बालक बार-बार झुक जाता।
उत्तर में खड़ा हिमालय, दक्षिण में सागर लहराता,
छह ऋतुओं से शोभित, तेरा अंग -अंग मुस्काता।

तेरा मेरा जन्मों का गहरा नाता,
तेरी आन के खातिर मैं, मर-मर जाता।
यहाँ जन्म लेकर अशोक, महान कहलाता,
चंद अपनी शीतलता से नहलाता।

सूरज तुझको हर पल रोशन करता,
पवन शीतल मंद सुगन्धित बहता।
किसान पल-पल मेहनत करता,
जवान सीमा पर देश हेतु लड़ता।

 

Abhishek Chaturvedi
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One thought on “हे भारत माता!

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