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वो सुबह अनोखी कब होगी ?

जब व्याकुलता न होगी मन में,
न द्वेष ईर्ष्या होगी जन मे।

वो सुबह अनोखी कब होगी?

आगे बढ़ने की ललक भी होगी,
और क्षमा दया की झलक भी होगी।

वो सुबह अनोखी कब होगी?

न पीड़ा का कोई कारण होगा,
हर मुख्य से परम उच्चारण होगा।

वो सुबह अनोखी कब होगी?

हर ख्वाहिश दिल की पूरी होगी,
सुख दुःख के बीच न दूरी होगी।

वो सुबह अनोखी कब होगी?

 

 

Vikram Rusia
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