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जितना पानी नहीं है नदियों में तुम्हारी उतना सींनें में हम खून रखते हैं,
हिंदुस्तान उस सरजमीं का नाम हैं जहाँ शेर बसते हैं।

कुछ कुत्तों के सरहद पार करने से इलाका उनका नहीं होता,
देश के देश हमारे हो जाते हैं जब हम दहाड़ भरते हैं।

चंद जाने चली भी जाये परवाह किसे है,
हम अपने खून से ही भारत माँ का श्रृंगार करते हैं।

झुक कर उन्हें हम सलाम करते हैं,
जिनके सीने देश के लिये ढाल का काम करते हैं।

जाया नहीं जायेंगी कुर्बानियां इनकी भी,
बहेगा खून उनका नालियों में जो हूरो का इंतज़ार करते हैं।

एक ही धमाके में नेस्तनाबूद हो जाएगी कौम तुम्हारी,
हम सीने में कैद इतना बारूद रखते हैं।

इतिहास गवाह, हमेशा छिप कर वार किया है तुमने,
हमें यकीन है उस जमीन पर कुछ नपुंसक कुछ गीदड़ या दोनों बसते हैं।

 

 

Swatantra Katiyar

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One thought on “शहीदों की शान में…

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