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एक दिन खीजकर कसम बोली रीझकर|

व्यर्थ है तेरी जवानी , तू भी लिख कोई कहानी

जिसमे हो एक नायिका, जो हो सुरीली गायिका

पतली हो जिसकी नासिका , जो हो तेरी आशिका ।

तू हो उसका श्याम , वो हो तेरी राधिका ॥

यह सुन जोश में आकर , कसम को उठाकर

लिखना किया शुरू, कसम को बना गुरु

पर एक शब्द भी न लिख पाया ,

मैं स्वयं पर ही झल्लाया ।

कि इस युग में कैसे मिलेगी राधिका

जो हो सच्ची साधिका ।

जो मुझे मेरी बातो से परख ले,

बिना कुछ कहे ही सब समझ ले |

 

Vikram Rusia
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