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ना कोई साधन ना कोई खिलौना चाहिऐ........
माँ! मुझे तो बस तेरी गोद का तकिया और ममता का बिछौना चाहिऐ........
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दर्द होता जब जब मुझको, आँसू तेरे भर आते हैं.....
डर लगता है जब भी तेरे आँचल में छुप जाते हैं....
मिल गया जो तेरे आँचल का खाजाना मुझको......
अब ना कोई चाँदी ना कोई सोना चाहिऐ.......
माँ! मुझे तो बस तेरी गोद का तकिया और ममता का बिछौना चाहिऐ........
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भरे जब पेट मेरा तब निवाला तेरा उतरता है........
मुस्काता हूँ मै जब भी दिल तेरा भरता है.....
करता हूँ यही फरीयाद खुदा से हरदम........
तेरे बिन ना कभी हसना ना कभी रोना चाहिये.........
माँ! मुझे तो बस तेरी गोद का तकिया और ममता का बिछौना चाहिऐ.......
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माँ मैं तुझसे बना "अक्स" तेरा ही तो हूँ...
तेरी आँखो का ऊँघयाता सबेरा ही तो हूँ.....
ठहरा है जो तेरा विश्वास इस भोर पर.....
न बिसराऊँगा कभी न कभी खोना चाहिये........
माँ! मुझे तो बस तेरी गोद का तकिया और ममता का बिछौना चाहिऐ.........

Akshesh Shrivastava
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