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मैं नई नबेली लाया हूँ, मन नाचे आज नचा लेना।

 

कविता श्रृंगार सजाएगी, यौवन का यार बनाएगी।

ग़ज़ल सजी बैठी श्वर में, मांगेगी साज हथेली का।

कवियों के चिन्तन की रचना, मेहँदी सी रचती जाएगी।

 

मैं नई नबेली लाया हूँ, मन नाचे आज नचा लेना।

 

नयनों में कजरा सजा-धजा, नज़र व्यंग की तिरछी है,

गीतों के होंठ रशीले हैं, राश पान मिले धीरे-धीरे।

पहिल करधनी से जेवर हैं, छंदों में छन-छन बजेंगे।

 

मैं नई नबेली लाया हूँ, मन नाचे आज नचा लेना।

 

किस की कविता, रचना किस की।

किस के संग, कहाँ चली जाये।

जो मन चाहे, संग ले जाना, सकोच झिझक में न पड़ना।

 

मैं नई नबेली लाया हूँ, मन नाचे आज नचा लेना।

 

Lokesh Rusia
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