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चले जा रहे हो तुम हमसे बिछड़ कर ,
न जाने मुलाकात कब हो जीवन में।
रुँधा है गाला और आँखें सजल है ,
तरल है ह्रदय आज कितना विकल है।

मगर बिजलियों सी सघन श्याम वन में,
भरे हैं कहूँ कैसे क्या भाव मन में।
बहुत दिन बिताए सभी साथ रह कर,
कभी खूब हंस कर, कभी खूब रो कर।

वो रोना, वो हंसना, वो गम, और वो खुशियां,
सजग हो रहे हैं, इस जुदाई के क्षण मे।
हमारी भूल चूक को तुम भूल जाना,
कहीं अपने दिल में हमें भी बसना।

मुबारक हो तुमको तुम्हारी तमन्ना, 
तुम्हे अलविदा आज के इस मिलन में।
चले जा रहे हो तुम हमसे बिछड़ कर ,
न जाने मुलाकात कब हो जीवन में।

 

 

Chandrakant Singh
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