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कुछ पल का प्यार, कहते पूजा,

मन ने माना, इसलिए और नहीं दूजा,

जन्म से नाता जिसका, उसका प्रभाव टूटा।

नई पीढ़ी का अंदाज़, समाज का डर झूठा,

शाख पे पत्ता लगा रहे, कहते मज़बूरी,

माता-पिता, परिवार की भावनाएं,

प्यार की आग में, आहूति जरूरी।

 

धन या सुन्दर तन,

नज़र से ओझल होने से पहले,

सुरक्षा की गारंटी करना ज़रूरी है।

चका चोंध रौशनी में,

दिया तले अँधेरा भी,

धरती के रिश्ते, अमानती लेन देन,

कच्ची दूध की तरह, तपना ज़रूरी है।

 

 

हवाओं ने युवा दिल से, सयम सुख छीना है।

चोखट की द्योड़ी हमने हटा दी,

अध्ययन की आंधी में खो गयी पवित्रता,

हसरतों ने विचार मन से चुरा लिए,

चीर हरण करने को, वस्त्र नहीं तन पर,

खुले केश कौन सी, प्रतिज्ञा में खुले हैं?

तुलसी घर आँगन में देखी थी मैंने,

दादी के साथ तुलसी सूख कर चली गयी|

 

 

चरित्र का निर्माण, टीवी के सीरियल से,

रामायण गीता, कौन पढता है।

शिक्षा के दौर में, करियर की होड़ है,

देहरी के संस्कार, कौन गढ़ता है?

 

Lokesh Rusia
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