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चलो अपनी माटी का चुम्बन करें हम,

चमकते नगीनों का, दर्शन करें हम।

 

मोहल्ले की गलियों में यादें पुरानी,

घर की सुगन्धित बातें पुरानी।

क्षितिज को छूने की ललक है मन में,

नदिया के जल की चमक है संग में।

जहाँ तक चले हैं सफलता मिली है,

माता-पिता की दुआएं फली हैं।

अभी और चलना, बढ़ना है आगे,

भाई-बहनों के रंगों को भरना है।

सात-समुन्दर के पार निकलकर,

अपना नया इतिहास लिखना है।

 

चलो अपनी माटी का चुम्बन करें हम,

चमकते नगीनों का, दर्शन करें हम।

Lokesh Rusia
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