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बीता बचपन खेल खिलौने
गुड्डा गुड़ियाँ की भरमार |

हुई ताजा वो याद पुरानी
आया अक्ती का त्यौहार ।

कुछ खेल, कुख रीति रिवाज,
भूल चले हम लोग है , आज |

मेले, ठेले और भरे बाज़ार,
रंग बिरंगा था संसार॥

भूली बिसरी उन यादों को
चलो जियें अब बच्चों के संग।

नई दुनिया के साथ चले पर,
भरे परम्पराओं के रंग ||

 

 

Richa Tikarya
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